आंशु की नदिया बहेंगी एक दिन
लाशो की नाव चलेंगी
सवारिय भी होंगी लाशे
अफोसोस देखने को नज़ारे, न तुम होगे न हम |
सर कटी होंगी और बिछी होंगी
कटे सर हसेंगे एक दुसरे पर
ये क्या किया हमने? क्यू कट गए?
अफ़सोस रोने वाला न कोई, न तुम होंगे न हम |
कब्र खोदेंगी लाशे खुद अपनी
एक लाश होंगे चार कंधो के ऊपर
न होंगी कोई मातम न कोई अफ़सोस
अफ़सोस लाश उठाने वाले भी होंगे लाशे, ना तुम होंगे न हम |
करो लो कब्रों की अडवांस बुकिंग
नहीं तो वेटिंग लिस्ट में रह जाओगे
मिल भी गयी आर एस सी तो क्या
दो लाशे होंगी एक कब्र में, एक तुम होंगे एक हम |
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